इस मंदिर में आज भी धड़कता है भगवान श्रीकृष्ण का दिल, जानिए रहस्य!

Rochak News 04-07-2019 11:34:44
This temple is still beating the heart of Lord Shri Krishna know the secret

नई दिल्ली। ओडिशा के पुरी में मौजूद भगवान जगन्नाथ के प्रसिद्ध मंदिर से जुड़ी अनेक रहस्यमयी बातें प्रचलित हैं। इस मंदिर में भगवान जगन्नाथ के साथ-साथ उनके बड़े भाई बलराम एवं बहन सुभद्रा की भी प्रतिमा मौजूद है। प्रत्येक वर्ष निकलने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा तो पूरी दुनिया से भक्त भाग लेते हैं।

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माना जाता है कि रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ के रथ की रस्सी खींचने या छूने भर से सभी पापों से छुटकारा मिल जाता है। जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी एक काफी रहस्यमयी कथा प्रचलित है। इस मंदिर का सबसे पूर्व प्रमाण महाभारत के वनपर्व में प्राप्त होता है। 

बताया जाता है कि सर्वप्रथम सबर आदिवासी विश्ववसु ने नीलमाधव के रुप में इनकी पूजा की थी। वहीं, बात करें इस मंदिर की तो स्थानीय मान्यताओं मुताबिक बताया जाता हैं कि इस मूर्ति के अदंर भगवान कृष्ण का दिल का एक पिंड रखा हुआ है, जिसमें ब्रह्मा विराजमान है। 

पौराणिक कहानियों की माने तो, ब्रह्मा कृष्ण के नश्वर शरीर में विराजमान थे। कृष्ण के मरने के पश्चात पांडवों ने उनके शरीर का दाह-संस्कार कर दिया। उस दौरान कृष्ण का दिल जलता ही रहा। ऐसा होने पर भगवान ने पांडवों को आदेश दिया कि इसे जल में बहा दिया जाए। बाद में उस दिल ने लट्ठे का रूप ले लिया।

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जगन्नाथ रथ यात्रा: आज भी प्रतिमा में है दिल, किसी के देखने पर है मनाही
मान्यता है कि उस दिन के पश्चात से श्रीकृष्ण का दिल जगन्नाथ जी की प्रतिमा के भीतर ही है। कहानी की माने तो, हर 12 साल में भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा बदली जाती है किन्तु उस दिल पर किसी की नजर नहीं पड़ पाती। प्रतिमा के बदले जाने की प्रक्रिया को 'नवा-कलेवर' बोला जाता है।

दरअसल, प्रतिमा तैयार करने वाले जब उस लट्ठ को नई मूर्ति में रखते हैं उनके आंखों पर पट्टी बांध दी जाती है। इसके संग ही हाथों पर भी वस्त्र बांधे जाते हैं। इस क्रिया के दौरान बिजली भी काट दी जाती है जिससे अंधेरा रहे तथा कोई और नहीं देख सके। ऐसा भी बोला जाता है कि इस दिल को देखने वाले की मौत हो जाएगी।

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